अब कोई भी बच्चा नहीं छोड़ेगा पढ़ाई: स्कूल शिक्षा में तीन चरणों वाली नई निगरानी व्यवस्था लागू
देश में स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या कम करने और हर बच्चे को शिक्षा से जोड़कर रखने के लिए शिक्षा विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। अब विद्यालयों में ऐसी व्यवस्था लागू की जा रही है, जिसमें कोई भी बच्चा बीच में पढ़ाई न छोड़े। इसके लिए तीन चरणों वाली निगरानी प्रणाली शुरू की गई है, जिस पर शिक्षकों, प्रधानाध्यापकों और शिक्षा अधिकारियों की संयुक्त जिम्मेदारी तय की गई है।
इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य है कि छात्र-छात्रा एक कक्षा से दूसरी कक्षा में बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ें और प्रदेश में शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित हो सके।
📘 नई निगरानी प्रणाली क्यों ज़रूरी?
शिक्षा विभाग के अनुसार, स्कूल शिक्षा में तीन महत्वपूर्ण मोड़ होते हैं जहाँ बच्चों के पढ़ाई छोड़ने का सबसे अधिक खतरा होता है:
- कक्षा 5 से कक्षा 6
- कक्षा 8 से कक्षा 9
- कक्षा 9 से कक्षा 11
इन्हीं कक्षाओं में अधिकतर बच्चे या तो स्कूल बदलते हैं या किसी कारण पढ़ाई बीच में छोड़ देते हैं। इसी समस्या को रोकने के लिए सरकार ने अब ट्रांज़िशन ट्रैकिंग सिस्टम को अनिवार्य कर दिया है।
📍 चरण 1: कक्षा 5 से कक्षा 6 तक का ट्रांज़िशन
प्राथमिक विद्यालयों को यह सुनिश्चित करना होगा कि
- कक्षा 5 पास करने वाला हर बच्चा कक्षा 6 में प्रवेश ले,
- यदि किसी छात्र ने स्कूल बदला है, तो उसका नया स्कूल रिकॉर्ड में दर्ज हो,
- अभिभावकों से संपर्क कर यह समझाया जाए कि यह शिक्षा का महत्वपूर्ण चरण है।
इससे प्राथमिक से जूनियर हाईस्कूल में जाकर बच्चों के पढ़ाई छोड़ने की दर कम होगी।
📍 चरण 2: कक्षा 8 से कक्षा 9 तक की निगरानी
जूनियर हाईस्कूलों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि:
- कक्षा 8 आठवीं उत्तीर्ण करने वाला एक भी बच्चा सूची से गायब नहीं होना चाहिए।
- प्रत्येक छात्र का कक्षा 9 में प्रवेश ट्रैक किया जाए।
- जो छात्र स्कूल बदलते हैं, उनके नए स्कूल की जानकारी दर्ज की जाए।
- छात्रों और अभिभावकों से नियमित संवाद रखा जाए।
इस चरण में सबसे अधिक ड्रॉपआउट देखा जाता है क्योंकि बच्चे अक्सर हाईस्कूल में बदलाव के कारण पढ़ाई छोड़ देते हैं। इसलिए यह निगरानी अत्यंत जरूरी है।
📍 चरण 3: कक्षा 9 से कक्षा 11 तक की कड़ी फॉलो-अप व्यवस्था
हाईस्कूलों की जिम्मेदारी होगी कि:
- कक्षा 9 और 10 के विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करें,
- कक्षा 10 पास करने वाले हर छात्र का कक्षा 11 में प्रवेश ट्रैक किया जाए,
- जिन बच्चों के परिवार आर्थिक संकट में हों, उन्हें सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाए।
कक्षा 9 से 11 तक बच्चों का भविष्य तय होता है, इसलिए यह चरण सबसे संवेदनशील माना गया है।
📑 हर स्कूल से मांगी जाएगी रिपोर्ट
बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के मंडलीय और जिला अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि:
- वे हर स्कूल से ट्रांजीशन रिपोर्ट लें,
- किसी भी बच्चे का नाम सूची से गायब न हो,
- यदि बच्चे ने स्कूल बदला है, तो उसका नया स्कूल अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाए,
- बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह निर्बाध बनी रहे।
इससे पूरे जिले में विद्यार्थियों की पढ़ाई का वास्तविक डेटा उपलब्ध होगा और समस्या वाले क्षेत्रों की तुरंत पहचान की जा सकेगी।
👩🏫 शिक्षकों को सौंपे गए महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ
शिक्षक विद्यार्थियों के सबसे करीब होते हैं। इसलिए विभाग ने शिक्षकों को कई आवश्यक जिम्मेदारियाँ दी हैं, जैसे:
- नियमित रूप से बच्चों से बातचीत करना
- पढ़ाई में रूचि कम होने पर काउंसलिंग करना
- अभिभावकों को पढ़ाई के महत्व के प्रति जागरूक करना
- कमजोर बच्चों को अतिरिक्त सहायता देना
- स्कूल छोड़ने के कारणों का पता लगाना
शिक्षकों के लगातार फॉलो-अप से बच्चों की पढ़ाई में निरंतरता बनी रहेगी।
👨👩👧 अभिभावकों को भी किया जाएगा जागरूक
अभिभावकों से शिक्षकों को यह संदेश देना होगा कि:
- अगर बच्चा बीच में पढ़ाई छोड़ देगा, तो भविष्य पर गहरा असर पड़ेगा,
- स्कूल शिक्षा उनका हक है और सरकार सभी सुविधाएं उपलब्ध करा रही है,
- बच्चों को नियमित स्कूल भेजना उनकी जिम्मेदारी है।
परिवार और स्कूल दोनों की संयुक्त भूमिका से बच्चे आसानी से अगली कक्षा में बढ़ेंगे।
🎯 अभियान का मुख्य लक्ष्य
नई निगरानी प्रणाली का लक्ष्य है:
- ड्रॉपआउट दर को लगभग शून्य करना,
- हर बच्चे को 12वीं तक शिक्षा से जोड़े रखना,
- स्कूल बदलने वाले बच्चों की सही जानकारी दर्ज करना,
- हर छात्र को अगली कक्षा तक पहुंचाना,
- सभी स्कूलों में शत-प्रतिशत नामांकन बनाना।
सरकार का मानना है कि अगर विद्यालय स्तर पर लगातार फॉलो-अप किया गया, तो बच्चों के स्कूल छोड़ने की समस्या को काफी हद तक खत्म किया जा सकता है।
निष्कर्ष
नई तीन-चरणीय निगरानी प्रणाली लागू होने से अब बच्चे पढ़ाई बीच में छोड़ने की स्थिति में नहीं रहेंगे। शिक्षकों, प्रधानाध्यापकों, शिक्षा अधिकारियों और अभिभावकों की संयुक्त जिम्मेदारी से शिक्षा विभाग का लक्ष्य है कि हर बच्चा निरंतर शिक्षा प्राप्त करे और ड्रॉपआउट दर न्यूनतम हो जाए।
यह कदम पूरे प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
