1757 की जंगे आज़ादी | प्लासी का युद्ध और भारत में अंग्रेज़ी राज की शुरुआत
परिचय
भारत की आज़ादी की लड़ाई सिर्फ 1857 से शुरू नहीं हुई थी। इसकी शुरुआत उससे बहुत पहले हो चुकी थी। साल 1757 भारतीय इतिहास का एक बहुत ही महत्वपूर्ण साल है। इसी साल प्लासी का युद्ध हुआ, जिसने भारत में अंग्रेज़ों के राज की नींव रखी। कई इतिहासकार मानते हैं कि 1757 की घटनाएँ ही भारत की आज़ादी की पहली लड़ाई थीं।
1757 से पहले भारत की स्थिति
1757 से पहले भारत में मुग़ल साम्राज्य कमजोर हो चुका था। औरंगज़ेब की मृत्यु के बाद मुग़ल बादशाहों की ताकत कम होती चली गई। अलग-अलग इलाकों में नवाब और राजा अपने-अपने राज्य चला रहे थे।
इसी कमजोरी का फायदा उठाकर ईस्ट इंडिया कंपनी भारत में व्यापार करने के बहाने आई। शुरू में अंग्रेज़ सिर्फ व्यापारी थे, लेकिन धीरे-धीरे वे राजनीति और सेना में भी दखल देने लगे।
बंगाल और नवाब सिराजुद्दौला
उस समय बंगाल भारत का सबसे अमीर प्रदेश था। 1756 में नवाब सिराजुद्दौला बंगाल के नवाब बने। वे बहादुर और स्वाभिमानी शासक थे। उन्हें अंग्रेज़ों की चालाकियाँ और गैरकानूनी काम बिल्कुल पसंद नहीं थे।
नवाब ने अंग्रेज़ों को साफ आदेश दिया कि वे बिना इजाज़त किले न बनाएं और टैक्स चोरी बंद करें। लेकिन अंग्रेज़ों ने उनकी बात नहीं मानी और उनके खिलाफ साज़िश शुरू कर दी।
अंग्रेज़ों की साज़िश और गद्दारी
अंग्रेज़ों ने नवाब के दरबार के कुछ लोगों को लालच देकर अपने साथ मिला लिया। इनमें मीर जाफ़र, जगत सेठ और कुछ अन्य लोग शामिल थे। इन लोगों ने पैसों और सत्ता के लालच में अपने ही नवाब से धोखा किया।
यही गद्दारी 1757 की जंगे आज़ादी की सबसे बड़ी कमजोरी बन गई।
प्लासी का युद्ध (1757)
23 जून 1757 को बंगाल के प्लासी नामक स्थान पर युद्ध हुआ। एक तरफ नवाब सिराजुद्दौला की बड़ी सेना थी और दूसरी तरफ रॉबर्ट क्लाइव के नेतृत्व में अंग्रेज़ों की छोटी लेकिन चालाक सेना।
युद्ध के समय मीर जाफ़र और उसके साथियों ने नवाब की मदद नहीं की। इस वजह से नवाब की सेना हार गई और अंग्रेज़ जीत गए। यह हार भारत के लिए बहुत भारी साबित हुई।
नवाब सिराजुद्दौला की शहादत
युद्ध के बाद नवाब सिराजुद्दौला को पकड़ लिया गया और 2 जुलाई 1757 को उनकी हत्या कर दी गई। उन्होंने अंग्रेज़ों के सामने झुकने से इनकार कर दिया था।
नवाब सिराजुद्दौला को भारत की आज़ादी की लड़ाई का पहला शहीद माना जाता है। उनकी कुर्बानी ने आगे आने वाली पीढ़ियों को आज़ादी के लिए लड़ने की प्रेरणा दी।
1757 के बाद अंग्रेज़ों का राज
प्लासी की जीत के बाद अंग्रेज़ों ने मीर जाफ़र को बंगाल का नवाब बना दिया, लेकिन असली ताकत ईस्ट इंडिया कंपनी के पास ही रही।
धीरे-धीरे अंग्रेज़ों ने टैक्स, सेना और शासन पर पूरा नियंत्रण कर लिया। भारत की दौलत इंग्लैंड भेजी जाने लगी और आम जनता पर भारी अत्याचार होने लगे।
क्या 1757 पहली जंगे आज़ादी थी?
आमतौर पर 1857 को पहली जंगे आज़ादी कहा जाता है, लेकिन 1757 में नवाब सिराजुद्दौला ने सबसे पहले अंग्रेज़ों के खिलाफ आवाज़ उठाई।
इसलिए कई इतिहासकार मानते हैं कि 1757 ही भारत की आज़ादी की लड़ाई की असली शुरुआत थी।
1757 का ऐतिहासिक महत्व
- इसी साल अंग्रेज़ी शासन की शुरुआत हुई
- भारत की आज़ादी की लड़ाई की नींव पड़ी
- नवाब सिराजुद्दौला जैसे वीर शहीद सामने आए
- लोगों को अंग्रेज़ों की असली नीयत समझ में आई
निष्कर्ष
1757 की जंगे आज़ादी हमें यह सिखाती है कि आपसी फूट और गद्दारी किसी भी देश को गुलामी में धकेल सकती है। नवाब सिराजुद्दौला की बहादुरी और बलिदान आज भी हमें देश से प्यार और हिम्मत का संदेश देते हैं।
आज हम आज़ाद भारत में रह रहे हैं, तो हमें 1757 की उस पहली लड़ाई को याद रखना चाहिए, जिसने आज़ादी के लंबे संघर्ष की शुरुआत की थी।
